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हम नीलम रतन के बारे में चर्चा करेंगे ये क्या है और अगर आपको ये फायदा करता है तो किस हद तक फायदा करता है और अगर नुकसान करे तो कैसे आपकी जिंदगी बदल सकता
दरअसल नीलम रतन खनिज corundum से रसायनित होता है
एक एल्यूमीनियम ऑक्साइड (α-Al2O3) है। नीला नीलम नौ ग्रहो के रत्नों में सबसे तेज बढ़ती लोकप्रियता वाला रत्न है। इसे सोरि रत्न भी कहा जाता है। यह कश्मीर, श्रीलंका, रूस, अमेरिका आदि में पाया जाता है। सबसे अच्छे नीलमणि श्रीलंका में पाया जाता है। इस रत्न का रंग मोर की गर्दन के रंग की तरह नीला होता है। यह दो प्रकार का है- इंद्रनील जो कि गहरे नीले रंग का है और और जलनील जो हल्के नीले रंग का है। नीला नीलम पहनने के कुछ लाभ इस प्रकार है
दूसरे रत्नो के साथ नीले नीलम का संयोजन हड्डी का कैंसर, किडनी की समस्या, तंत्रिका रोग और लकवा जैसे रोगो से लड़ने में मदद करता है। नीलम रत्न पहनने वाले व्यक्ति के जीवन में धन, प्रसिद्धि, स्वास्थ्य, खुशी, समृद्धि, लम्बी आयु, मानसिक शांति लाता है। नीला नीलम पहनना यात्रा की समस्याएं, आतंक, चोर, दुर्घटनाओं, तूफान, आग या प्राकृतिक आपदाओं की समस्याओं से सुरक्षा में मदद करता है।
नीलम धारण करने के फायदे :
यह सबसे तेज़ असर करने रत्नों में से एक है और इसका प्रभाव तुरंत महसूस होता है। यह १ पहनने के पहले दिन से ही यह धन, शुभकामनाएं, अवसर और पदोन्नति आदि लाभ दे सकता है।
दरअसल नीलम रतन खनिज corundum से रसायनित होता है
एक एल्यूमीनियम ऑक्साइड (α-Al2O3) है। नीला नीलम नौ ग्रहो के रत्नों में सबसे तेज बढ़ती लोकप्रियता वाला रत्न है। इसे सोरि रत्न भी कहा जाता है। यह कश्मीर, श्रीलंका, रूस, अमेरिका आदि में पाया जाता है। सबसे अच्छे नीलमणि श्रीलंका में पाया जाता है। इस रत्न का रंग मोर की गर्दन के रंग की तरह नीला होता है। यह दो प्रकार का है- इंद्रनील जो कि गहरे नीले रंग का है और और जलनील जो हल्के नीले रंग का है। नीला नीलम पहनने के कुछ लाभ इस प्रकार है
दूसरे रत्नो के साथ नीले नीलम का संयोजन हड्डी का कैंसर, किडनी की समस्या, तंत्रिका रोग और लकवा जैसे रोगो से लड़ने में मदद करता है। नीलम रत्न पहनने वाले व्यक्ति के जीवन में धन, प्रसिद्धि, स्वास्थ्य, खुशी, समृद्धि, लम्बी आयु, मानसिक शांति लाता है। नीला नीलम पहनना यात्रा की समस्याएं, आतंक, चोर, दुर्घटनाओं, तूफान, आग या प्राकृतिक आपदाओं की समस्याओं से सुरक्षा में मदद करता है।
नीलम धारण करने के फायदे :
यह सबसे तेज़ असर करने रत्नों में से एक है और इसका प्रभाव तुरंत महसूस होता है। यह १ पहनने के पहले दिन से ही यह धन, शुभकामनाएं, अवसर और पदोन्नति आदि लाभ दे सकता है।
- यदि नीलम उपयुक्त है तो यह आश्चर्यजनक परिणाम दिखाता है। ऊर्जा और निराशा की मंदता को दूर करने में कोई भी तेजी से राहत महसूस कर सकता है
- नीलम स्टोन एक उच्च सुरक्षात्मक रत्न है यह दुश्मन, बुरी नज़र, ईर्ष्या आदि से सुरक्षा में मदद करता है।
- यह पाचन में सुधार, सुस्ती को दूर करता है और फोकस और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद करता है।
- यह उत्कृष्ट चिकित्सा क्षमता है इंद्रियों को शांत करना और शांति और धैर्य देता है।
- यह कुंडली में नकारात्मकता, अज्ञात भय और परिसरों स्थितियों को हटा देता है।
- नीलम का धन पर सीधा प्रभाव पड़ता है यह वित्त में सकारात्मक वृद्धि प्रदान करता है यह आय के कई स्रोतों के साथ आशीष दे सकता है।
- यह नाम, प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा देता है
- इसके अलावा यह कानून क्षेत्र में व्यक्तियों के लिए बहुत अच्छा रत्न है जैसे मैजिस्ट्रेट्स और कानून प्रैक्टिशनर, उनके पेशे में सफलता के लिए।
नीलम धारण करने के नुकसान :
- कमजोर शनि की शुभ भाव स्थिति में नीलम उसके बल को कई गुणा बढ़ाने की सामर्थ्य रखता है। उसी प्रकार अशुभ भाव स्थित या अशुभ भावों का स्वामी होकर शनि यदि कुण्डली में कहीं मौज़ूद हो तो नीलम धारण करने से उसकी अशुभता तथा मारकता बेहद बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में किसी योग्य एस्ट्रोलॉजर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके.............
- इसके अलावा कामी अथवा आलसी व्यक्ति को नीलम बिल्कुल नहीं धारण करना चाहिए। क्योंकि ऐसी अवस्था में शनिदेव उस व्यक्ति के और खिलाफ़ हो जाते हैं तथा उसे सज़ा दे डालते हैं।
- नीलम को नीलमणि या अंग्रेजी में सैफायर नाम से भी जाना जाता है। इसकी गुणवत्ता निःसंदेह है किंतु तब जबकि इसमें किसी प्रकार का कोई दोष न हो। चीरा लगा, धारीदार, सफेदी लिए हुए अथवा किसी भी प्रकार छिद्रित या फिर खण्डित नीलम धारण करने से बीमारी, हानि, शत्रु द्वारा घेर लिया जाना, अपमान आदि का शिकार होना पड़ता है।
पढ़ें नीलम कब और क्यों नहीं करता है असर ( 7 सावधानियां)
- शनिवार के दिन मदिरा-तामसिक भोजन का त्याग करें ।
- विकलांग लोगों के प्रति सेवा भाव रखें।
- घर के वृद्ध लोगों के प्रति आदरपूर्ण व्यवहार रखें।
- प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष के दूसरे शनिवार को रत्न को दूध, घी, गंगाजल, तिल और मिश्री मिले जल से अभिसिंचित करें।
- रत्न का शम्मी के लकड़ी से 108 बार " ॐ शन्नोदेवीरभिष्ट्यः आपोभवन्तुपीतये शंय्योरभिस्रवन्तुनः "मंत्र के उचारण के अभिषेक कीजिए। इससे रत्न जागृत होगा और सकारत्मक ऊर्जा प्रदान करेगा।
- नीलम धारण करने के पश्चात किसी को कोई झूठा आश्वासन न दीजिए नहीं तो दुष्परिणाम गंभीर होगा।